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पुलिस के सारे फार्मूले फेल
रायपुर.
अपराधों को काबू करने आला अधिकारियों के सारे फार्मूले फेल हो चुके
हैं। कम्युनिटी पुलिसिंग तहत लागू फंडे भी काम नहीं आ रहे। फेस टू
फेस कार्यक्रम
में आम लोगों की समस्याओं को सुनने वाले आला पुलिस अफसरों को जमीनी
सच्चाई का पता
ही नहीं है।
हर शिकायत पर एफआईआई की बात तो दूर पुलिस के थाने स्तर का अमला
शिकायतें तक दर्ज
नहीं करता। बढ़ती आपराधिक घटनाओं से निपटने के लिए न तो कहीं कोई
ट्रेनिंग की
व्यवस्था है न अमले की कमी पूरी करने के प्रति गंभीरता। शहर को
पूर्व और पश्चिम
एएसपी जोन में बांटने का फामरूला भी अब तक कारगर साबित नहीं हो
पाया
है।
शहर में युवा और ऊर्जावान अधिकारियों की कमी महसूस की जा जाने लगी
है। कई इलाकों
की कमान ऐसे अधिकारियों के हाथों हैं,
जो रिटायरमेंट के करीब हैं अथवा संविदा पर चल
रहे हैं। महकमे में छापामार अमले का भी नितांत अभाव है,
जिसके साथ आला अधिकारी बड़ी
कार्रवाई कर सकें।
राजधानी अपराधियों के गिरफ्त में आने के बाद लोग कुछ अधिकारियों के
पुराने दौर
को याद कर रहे हैं। वे किस तरह अपने एसी दफ्तर से बाहर वेश बदलकर
रात-बे-रात छापा
मारने निकलते थे। एक तत्कालीन एसएसपी ने ट्रक ड्राइवर के वेश में
आरंग टोल नाका पर
धावा बोला और अवैध वसूली का मामला पकड़ा। इस कार्रवाई में कुछ
पुलिस वालों पर भी
गाज गिरी थी। इसी तरह गुढ़ियारी थाने लूट की रिपोर्ट लिखवाने पहुंच
गए थे। रिस्पांस
टाइमिंग पर थाना प्रभारी की जमकर खबर ली थी।
कैसे पैदा हो अपराधियों में खौफ :
जानकार पुलिस अधिकारियों का कहना है कि
गुंडा और लफंगा तत्वों पर नियंत्रण के लिए जरूरी है कि जब कोई
छेड़खानी करे अथवा
गैंगबाजी करता पकड़ा जाए उनकी मौके पर जमकर धुनाई हो। इससे
क्रिमिनल्स के मन डर
पैदा होगा और अपराध करने से एक बार सोचेगा जरूर।
साथ ही प्रीवेंटिव अभियान के तहत होटल,
ढाबे,
लॉज,
बैंक,
स्कूलों के आसपास,
बस
स्टैंड,
रेलवे स्टेशन जैसे तमाम पब्लिक प्लेस में नियमित चेकिंग कर
संदिग्धों की
धरपकड़ की जाए। माइन एक्ट की कार्रवाई भी लगातार होती रहे। सट्टा
जुआ तो कभी अवैध
शराब बिक्री के खिलाफ कार्रवाई।
एडिशनल एसपी सिटी की नियुक्ति अटकी
आला अधिकारियों में चल रहे टेंशन की वजह से एडिशनल एसपी सिटी
पश्चिम की नई
नियुक्ति अटकी हुई है। एएसपी शशि मोहन सिंह के लंबी छुट्टी पर जाने
के बाद से यह
महत्वपूर्ण पद खाली है।
आला अधिकारियों के बीच महकमे का मनोबल भी गिर रहा है। थाने स्तर पर
ही नहीं
वरिष्ठ अधिकारियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती कि आखिर किस
आदेश का किस तरह
से पालन किया जाए। इसके चलते कई बार अफसर खुलकर कार्रवाई करने में
हाथ खींच लेते
हैं ताकि कोप का भाजन न बनना पड़ा।
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