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सभी भारतीयों की निजी जानकारियां रजिस्टर में
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर)तैयार करने का कार्य एक अप्रैल
से शुरू होगा,
जिसमें
1.03
अरब भारतीयों की निजी जानकारियां होंगी। यह कार्य जनगणना
2011
के
साथ-साथ चलेगा। लोगों को गिनने,
पहचानने और पहचान पत्र जारी करने का यह काम दुनिया
के सबसे बड़े प्रयासों में से एक होगा।
गृहमंत्रालय का प्रयास है कि एनपीआर और नंदन नीलकनी के नेतृत्व
वाले प्राधिकरण
से मिलने वाले यूनिक आइडेंटिटी (यूआईडी) नंबर में एकरूपता हो। फिर
भी इसमें कुछ
संदेह है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने माना कि यह अभी तक तय नहीं
हुआ है कि पहचान
पत्र कौन जारी करेगा और किसे जारी किया जाएगा।
एनपीआर में इकट्ठा किए गए आंकड़ों के आधार पर यूआईडी नंबर दिए
जाएंगे। एनपीआर
में सभी लोगों को शामिल किया जाएगा। बायोमीट्रिक नमूने एकत्रित
करने के लिए केवल
15
वर्ष से ऊपर के लोग पात्र होंगे। इसी तरह केवल
18
वर्ष से ऊपर के लोगों को पहचान
पत्र जारी किए जाएंगे। यूआईडी नंबर प्रत्येक व्यक्ति को दिया जाएगा
और बाद में जारी
होने वाले पहचान पत्र में इसे शामिल किया जाएगा।
एनपीआर के तहत विभिन्न जानकारियां जुटाई जाएंगी,
जिसमें लोगों के फोटोग्राफ,
उंगलियों के निशान और आइरिस जैसे बायोमीट्रिक्स भी शामिल होंगे।
पहले चरण में एक अप्रैल से
30
सितंबर तक घरों की सूची और आवासों की गिनती का काम
होगा। इस कवायद से जनगणना कर्मियों को घर की प्रत्येक जानकारी मिल
जाएगी,
जैसे कि
इसके सदस्यों को उपलब्ध सुविधाएं और आवास बनाने में उपयोग की गई
सामग्री। अगले चरण
में अगले साल
9
से
28
फरवरी तक जनगणना होगी। जनगणना में
2,200
करोड़ रुपए और एनपीआर
तैयार करने में
3,756
करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने में शामिल होंगे
35
राज्य व केंद्र शासित प्रदेश
640
जिले
5,767
तहसील
7,742
शहर
6,08,786
गांव
24
करोड़ घर
1.2
अरब लोग और
25
लाख से अधिक कर्मचारी।
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