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माओवादी सशस्त्र विद्रोह की ताक में
केंद्रीय
गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा है कि माओवादी वर्ष
2050
तक
देश में व्यवस्था बदलने के लिए सशस्त्र विद्रोह की योजना बना रहे
हैं। इसके लिए
उन्होंने अपनी सेना बनानी भी शुरू कर दी है। गृह सचिव ने दिल्ली
में इंस्टीट्यूट ऑफ
डिफेंस स्टडीज एंड एनलिसिस में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि इन
वामपंथी अतिवादियों
के खिलाफ खूनी संघर्ष लंबा खिंचने वाला है और हमें ऐसे दस्तावेज
मिले हैं,
जिनसे यह
पता चलता है कि माओवादी वर्ष
2050
तक भारतीय राज्य को उखाड़ फेंकने की रणनीति बना
रहे हैं।
पिल्लई के मुताबिक,
उनके इस एजेंडे में सेना के कई पूर्व जवान उनकी
मदद कर रहे हैं। गृह सचिव ने यह भी कहा है कि माओवादी सटीक खुफिया
जानकारियों की
मदद से हमलों की वारदात को अंजाम दे रहे है। उन्होंने कहा कि ऐसी
जानकारी है कि
सेना के कुछ पूर्व जवान और अर्ध-सैनिक बलों के सेवानिवृत्त जवान
नक्सलियों को उनके
ऑपरेशनों में मदद कर रहे हैं।
बातचीत के बारे में गृह सचिव ने कहा कि माओवादी बातचीत के प्रति
गंभीर नहीं थे,
क्योंकि इसके लिए उन पर दबाव नहीं था। गृह सचिव ने कहा है कि
फिलहाल माओवादी खुद को
संगठित करने और अपनी सेना बनाने की योजना में प्रयासरत हैं। विकास
के अभाव और
प्रशासन की गैर-मौजूदगी से भी माओवादियों को मदद पहुंच रही है।
उन्होंने यह भी माना कि कुछ इलाकों में प्रशासन नाम की चीज नहीं है
और सिविल
प्रशासन को इस रिक्तता को भरने और माओवादी इलाकों में नियंत्रण
पाने में वर्षो लग
जाएंगे। पिल्लई ने कहा कि हमें एक लंबी जंग लड़नी है एवं यह खूनी
संघर्ष लंबा
खिंचने वाला है और जहां तक मुझे लगता है हिंसा की घटनाएं भी बढ़ने
वाली हैं। जिन
इलाकों में माओवादियों की पकड़ है,
वहां तक पहुंचने के लिए हमारे पास सेना नहीं है।
हालांकि आशावादी होते हुए गृह सचिव ने यह भी कहा कि मुझे लगता है
कि दो से तीन
साल के बाद माओवादियों के मुकाबले भारत का पलड़ा भारी रहने वाला है
और तकरीबन
7
से
10
सालों में सिविल प्रशासन इन इलाकों में पूरी तरह अपना नियंत्रण पा
लेगा।
माओवादियों को मिलने वाली आर्थिक मदद पर पिल्लई ने कहा,
फिलहाल सीपीआई (माओवादी) की
सालाना आमदनी
1400
करोड़ है और
34
जिलों एवं
8
राज्यों में प्रभाव व्यापक है।
पिल्लई के मुताबिक,
बिहार जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। ज्यादातर इन्हीं जैसे
राज्यों में प्रतिकूल हालात हैं। जब ये राज्य चुनाव सहित दूसरे
उद्देश्यों के लिए
अर्ध-सैनिक बलों की मांग करते हैं तो केंद्र इस बात पर जोर देता है
कि यदि राज्यों
को और अर्ध-सैनिक बलों के लिए माओवादियों के खिलाफ अपना अभियान
जारी रखना
होगा।
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