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युग दृष्टा महात्मा
गांधी
आंनद वर्मा
अंग्रेजी
साम्राज्य के भारत वर्ष के सौराष्ट्र प्रांत में
2
अक्टूबर
को जन्मे
महान बालक का,
माता पिता ने स्नहेपूर्वक नामकरण किया
मोहनदास । कालांतर में अपने संतरूपी गुणो के साथ अहिंसक
आंदोलनो द्वारा युग प्रवर्तक संत मोहनदास करमचंद गांधी ने उस
विशाल साम्राज्य की चूले हिला दी जिसका सूर्य कभी अस्त नहीं
होता था ।
अपने बाल्य काल
से ही अत्यंत मेंधावी होने का परिचय देने वाले मोहनदास को आज
देश का बच्चा बच्चा महात्मा गांधी के नाम से याद करता है अपने
छात्र जीवन में पूर्णत: शांत स्वभाव के होने के साथ ही गांधी
जी कुछ शर्मीले भी थे । विद्यार्जन पूर्ण कर उन्होने वकालत की
पढाई पूर्ण की और दक्षिण अफ्रिका महाद्वीप में भी अंग्रेजी
शासन था जिसमे अश्वेतो के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता था
अफ्रिकी महाद्वीप में अश्वेतो के साथ होने वाले कू्रर व्यवहार
ने गांधी जी को बुरी तरह आंदोलित किया । फलस्वरू उन्होने वकालत
के पेशे को त्याग कर अश्वेतो को श्वेतो के दर्ुव्यवहार से
बचाने का संकल्प दिया । गांधी जी ने अफ्रीकी महाद्वीप में ही
अंग्रेजो के विरूध्द सत्याग्रह का आंदोलन प्रारंभ किया ।
कालांतर में गांधी जी अफ्रिकी महाद्वीप से भारत वापस लौट आए ।
भारत आकर गांधी
जी ने देश के करोडो लोगो की विपन्नता देखी श्वोतो का अत्याचार
देखा इसके बाद गांधी जी ने एक संकल्प किया की जब तक देश के
करोडो लोगो के पास पुरा वस्त्र नही होगा वे भी सिर्फ धोती पहना
करेंगे । इसके बाद गांधी जी ने अपना संपूर्ण जीवन मात्र एक
धोती पहनकर गुजारा । अंग्रेजो के विरूध्द निरंतर सत्याग्रह एवं
अहिंसक आंदोलन कर उन्होने देश को स्वतंत्र बनाने का बीडा उठाया
।
उन्ही दिनो देश
में स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए युवाओ के अनेक दल कार्यरत थे ।
गांधी जी ने युवा कांग्रेस में शामिल होकर एकजुट सत्याग्रह
करने का आव्हान किया । गांधी जी के आव्हान से लाखो युवा भारत
की स्वतंत्रता के लक्ष्य को लेकर उनके साथ हो लिए ।
देश की गरीबी पर
चिंतन करते हुऐ गांधी जी ने भारत के कोटि-कोटि युवाओ को न
सिर्फ एक जुट किया था बल्कि देश के युवाओ को रामराज्य के
स्थापना का सुनहरा सपना भी दिखाया । गांधी जी के रामराज्य के
नारे ने देश के कोटिश युवाओ को उनके पीछे ला कर खडा किया ।
रामराज्य के स्वप्न गांधी जी ने कांग्रेस के नेताओ को सत्य की
राह पर चलकर अहिंसक सत्याग्रह द्वारा देश को आजाद कराने की कसम
दी । गांधी जी के विचारो से संपूर्ण भारत में स्थापित हो रही
एकता एवं रामराज्य की कल्पना ने अंग्रेजो के होश उडा दिए ।
गांधी जी को देश द्रोही करार दिया जाकर जैल भेज दिया गया । यह
गांधी जी की विलक्षण प्रतिमा का ही चमत्कार था कि अंग्रेजो
द्वारा जेल भेज दिए जाने के बाद जैस संपूर्ण भारत में एक नया
जोश पैदा हो गया । सारे भारत से लोग अंग्र्रेजो के विरूध्द
स्वतंत्रता आंदोलन का आव्हान करते हुए सडको पर उतर आए । लाखो
युवा गांधी जी की तरह जेल जाने गिरफतारी देने लगे । अपने ही
वार से आहत अंग्रेजी हुकूमत गांधी जी को छोडने पर विवश हो गये
।
इसी समय द्वितीय
विश्व युध्द प्रारंभ हो गया । गांधी जी ने देश के युवाओं से
आव्हान किया कि वे सारे सत्याग्रह आंदोलन ठप कर दे । गांधी जी
की इस विचार धारा का विरोध करते हुए सुभाषचंद्र बोस ने
जापानीयो के साथ मिलकर अंग्रेजो के विरूध्द युध्द छोड दिया ।
कालांतर में द्वितीय विश्व युध्द समाप्त हुआ । किंतु अंग्रेज
गांधी जी की विलक्षण प्रतिभा से रूबरू हो चुके थे । जिस तरह
गांधी जी के एक आव्हान पर सारा राष्ट्र सत्याग्रह प्रारभ कर
देता था और गांधी जी के एक आव्हान पर ही सत्याग्रह समाप्त कर
देता था । उसे देखते हुए अंग्रेज यह समझ चुके थे कि मोहनदास
करमचंद गांधी कोई एक व्यक्ति नहीं है अपितू इस व्यक्ति में
सारे राष्ट्र की आत्मा बसती है। विश्वयुध्द से बुरी तरह टूट
चुका,
अंग्रेजी
साम्राज्य समझ चुका था कि अब भारत को स्वतंत्र करना ही होगा ।
वरना गांधी की ये आंधी उनको भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण
साम्राज्य वादी उप निवेशो से खदेड देंगी ।
अंतत: युगद्ष्टा
एवं युग प्रवर्तक संत महात्मा के रूप में सारे भारत की आत्मा
को पिरोहित करने मोहनदास करमचंद गांधी को अंग्रजो द्वारा चर्चा
के लिये लंदन बुलवाया गया जहॉ शांति पूर्वक सत्ताा भारतियो के
हाथ में स्थानातरीत करने का समझोता सम्पन्न हुआ ।
अपने विचारो एवं
अपनी कर्मठता से कोटि-कोटि भारतियो के हदय में राज करने वाले
महात्मा गांधी का एक स्वप्न राम राज्य का आज भी अधूरा है
गांधी जी के काल के कांग्रेस के मनीषी अब नही रहे आज कांग्रेस
नेता सिर्फ गांधी जी की छबि का दोहन करने तथा अपना हित साधने
में लगे हुए है ऐसे में अब फिर कोटिश भरतीयों कि निगाहे किसी
नए गांधी की राह देख रही है ।

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